Pravachan

धर्म का प्रभाव जितना कम, नारी का सम्मान उतना ज्यादा

New Delhi: गरीब और अमीर के बीच जो शोषण है, उससे भी ज्यादा खतरनाक, उससे भी ज्यादा लंबा शोषण पुरुष और नारी के बीच है। पुरुष नहीं चाहेगा और नारियों के …

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pravachan on women

स्त्री को बाधा समझने वाले भगोड़े होते हैं

New Delhi: तुम मुझसे पूछ रहे हो कि संतों ने कहा है कि स्त्री बाधा है। जिस किसी ने भी ऐसा कहा है…उसके लिए स्त्री बाधा रही होगी, यह बात …

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दुख को मिटाना हो, तो सुख की कल्पना छोड़नी पड़ेगी

New Delhi: यदि दुख को मिटाना हो, तो सुख की कल्पना छोड़ देनी पड़ेगी और दु:ख को ही जानना पड़ेगा। जो दुख को जानता है, उसका दु:ख मिट जाता है। …

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उसके पास सिर्फ मन होता है और कुछ नहीं

New Delhi: संन्यास का अर्थ ही यही है कि मैं निर्णय लेता हूं कि अब से मेरे जीवन का केंद्र ध्यान होगा। और कोई अर्थ ही नहीं है संन्यास का। …

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धर्म का प्रभाव जितना कम, नारी का सम्मान उतना ज्यादा

New Delhi: गरीब और अमीर के बीच जो शोषण है, उससे भी ज्यादा खतरनाक, उससे भी ज्यादा लंबा शोषण पुरुष और नारी के बीच है। पुरुष नहीं चाहेगा और नारियों …

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ध्यान की अवस्था के साथ ही जन्म लेते हैं हम

New Delhi: ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है-जहां कोई विचार नहीं होते, कोई विषय नहीं होता। साधारणतया हमारी चेतना विचारों से, विषयों से, कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि …

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