पुत्रदा एकादशी 2019: आज है साल की दूसरी एकादशी, विवाहित लोगों के लिए बेहद खास

putrada ekadashi
New Delhi: पौष शुक्ल एकादशी को पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) कहा गया है। वर्ष 2019 में पुत्रदा एकादशी 17 जनवरी( गुरुवार) को पड़ रही है। नि:संतान दंपती के लिए यह व्रत काफी लाभदायक बताया गया है।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत (Putrada Ekadashi) से योग्य संतान की प्राप्ति होती है और मृ’त्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। व्रत के फलस्‍वरूप भगवान संतान के आरोग्‍य का वरदान देते हैं और उनके लिए सफलता का मार्ग भी प्रशस्‍त करते हैं।

इनकी करते हैं पूजा

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। प्रात: स्नान करके पूजन और उपवास करना चाहिए। भगवान विष्णु (शालिग्राम) को गंगाजल से स्नान कराकर भोग लगाना चाहिए। पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। भगवान नारायण के साथ लक्ष्मी जी की साधना भी करनी चाहिए। इस दिन बाल गोपाल की पूजा भी लाभकारी मानी जाती है।

क्यों रखते हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत

दरअसल इस व्रत के नाम के जैसा ही इससे प्राप्त होने वाला फल है। जिन व्यक्तियों को संतान होने में बाधाएं आती है अथवा जो व्यक्ति पुत्र प्राप्ति की कामना करते हैं उनके लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत बहुत ही शुभफलदायक होता है। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को व्यक्ति विशेष को अवश्य रखना चाहिए, जिससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो सके। इस व्रत के प्रभाव से संतान की रक्षा भी होती है। । इस व्रत की खास बात यह है कि यह स्त्री और पुरुष दोनों को समान रूप से फल देता है।

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भद्रावती नगर में राजा सुकेतुमान व उनकी पत्नी शैव्या निवास करते थे। इस दंपत्ति के कोई संतान नहीं थी। दोनों को दिन-रात यह चिंता सताती थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें अग्नि कौन देगा। इसी चिंता में दोनों दिन-रात दुखी रहते थे। एक दिन राजा दुखी मन से वन में गए। राजा को वन में प्यास लगी। कुछ दूर भटकने पर उन्हें एक सरोवर दिखा। सरोवर के पास पहुंचने पर राजा ने देखा कि वहां कुछ दूरी पर ऋषियों के आश्रम बने हुए हैं। वहां बहुत से मुनि वेदपाठ कर रहे थे। राजा ने सरोवर से पानी पीया। प्यास बुझाकर राजा ने सभी मुनियों को प्रणाम किया।

ऋषियों ने राजा को आशीर्वाद दिया और बोले कि हम आपसे प्रसन्न हैं। राजा ने ऋषियों से उनके एकत्रित होने का कारण पूछा। तब उनमें से एक मुनि ने कहा कि वह विश्वदेव हैं और सरोवर के निकट स्नान के लिए आए हैं। राजा को ऋषियों ने बताया कि आज पुत्रदा एकादशी है, जो मनुष्य इस दिन व्रत करता है उसे संतान की प्राप्ति होती है। राजा ने मुनियों के कहे अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत आरंभ किया और अगले दिन द्वादशी को पारण (व्रत खोला) किया। व्रत के प्रभाव स्वरूप कुछ समय के पश्चात रानी गर्भवती हुईं और इन्हें योग्य संतान की प्राप्ति हुई।