महाभारत: दार्शनिक ग्रंथ के इन प्रवचनों में समाया है सफलता का राज

Pravachan
New Delhi: हिंदुओं के दो महाग्रंथ हैं- रामायण और महाभारत। दोनों की कथाएं कई तरह की सीख देती हैं। दोनों ही में दी गई सीख और बातें आज के जीवन में भी बहुत ही सहायक हैं। महाभारत से आप कई ऐसी बातें पा सकते हैं, जिन्‍हें अपनाने से आपको कभी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा…
संघर्ष

महाभारत की कथा में एक बड़ा संदेश है जीवन में निरंतर संघर्ष का। इस कथा में पग-पग पर संघर्ष दिखाया गया है। महाभारत में कथा की शुरुआत से अंत तक जीवन के संघर्ष को दर्शाया गया है। अम्बिका और अम्बालिका का संघर्ष हो या फिर गंगा को पाने के लिए शान्तनु संघर्ष का या उन दोनों के साथ के लिए भीष्म पितामह का संघर्ष। इस कथा की तो शुरुआत ही संघर्ष से हुई है। महाभारत कहती है कि जीवन में कभी भी, चाहे परिस्थितियां कैसी ही क्‍यों न हों, संघर्ष से हार मान कर नहीं बैठना चाहिए।

निर्णय लेने से पहले

महाभारत की कथा में यह देखने को खूब मिला की मुख्‍य और अहम पात्र भी दूसरों की बातों से अपने निर्णय लेते या बदलते नजर आए। इससे एक बहुत ही अहम सीख मिलती है। वह यह कि अगर हम अपने निर्णय लेने में खुद सक्षम नहीं हो पाते और उनके लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं या दूसरों की सलाह की प्रतीक्षा करते हैं, तो हम अपने भविष्‍य या अपने साथ होने वाली किसी भी घटना को स्‍वयं नियंत्रित भी नहीं कर पाएंगे। सीधी सी बात यह है कि अपने निर्णय अपने विवेक और संयम से लेना ही आपके हित में है।

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खुद पर करें यकीन

महाभारत में एक सीख जो हमें मिलती है वह यह है कि स्‍वयं पर यकीन करना बहुत जरूरी है। अगर हम खुद पर, अपनी क्षमताओं पर, अपने निर्णयों और योग्‍यताओं पर यकीन नहीं करेंगे, तो जीवन में सफल नहीं हो पाएंगे। धृतराष्ट्र ने जिस तरह गद्दी प्राप्‍त की, दुर्योधन ने जिन चतुराईयों से सत्ता पर राज करना चाहा, उनसे यही सीख मिलती है।

डर को करें दूर

जी हां, जिस मन में डर रहेगा, वह स्वछंद होकर जी नहीं पाएगा। डर हमेशा नाश और अंत की ओर ही अग्रसर करता है। अक्‍सर डर में हम ऐसे कम कर जाते हैं, जिन पर बाद में बहुत पछतावा होता है। महाभारत के पात्रों में डर और उसके परिणामों को खुब दिखा गया है। धृतराष्ट्र का गद्दी हाथ से जाने का डर, दुर्योधन का पांडवों से हार जाने का डर, कर्ण का अपनों के ही विरुद्ध युद्ध का डर। इन सभी पात्रों के निर्णयों को प्रभावित करता हुआ दिखा। इससे यह सीख मिलती है कि जब तक आपके मन में डर है, आप सही निर्णय नहीं ले पाएंगे और यह आपके भविष्‍य को भी प्रभावित करेगा।