कालभैरव जयंती 2018: जानें कालभैरव की पूजा का महत्व, उपाय और विधि, शत्रुओं से मिलेगा छुटकारा

New Delhi: शिव जी का रूप माने जाने वाले कालभैरव देव की जयंती (Kaal Bhairav Jayanti 2018) इस साल 29 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। काल भैरव अष्टमी को कालाष्टमी भी कहा जाता हैं। कालाष्टमी के दिन शिव शंकर के इस रूप का जन्‍म हुआ था।

भैरव का अर्थ है भय को हरने वाला, इसीलिए ऐसा माना जाता है कि कालाष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami 2018) के दिन जो भी व्यक्ति कालभैरव की पूजा करने से भय का नाश होता है। कालाष्टमी के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। विद्वानों का मानना है कि ये पूजा रात में की जाती है।

नारद पुराण में बताया है महत्व

नारद पुराण में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से मनुष्‍य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मनुष्‍य किसी रोग से लम्बे समय से पीड़‍ि‍त है तो वह रोग, तकलीफ और दुख भी दूर होती हैं।

काल भैरव की पूजा विधि

इस दिन भगवान शिव के स्‍वरूप काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो जाएं। संभव हो तो गंगा जल से शुद्धि करें। व्रत का संकल्‍प लें। पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें। ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः का जाप करें। इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें। अर्धरात्रि में धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करें। व्रत के सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं।

Kaal Bhairav Ashtami 2018

काल भैरव के उपाय

काल भैरव की पूजा से कोर्ट कचहरी के मामलों में फंसे लोगों को आराम मिलता है। सालों से चले आ रहे मुकदमे से परेशान व्यक्ति को सच्चे मन से भैरो बाबा की उपासना करनी चाहिए। रात्रि में भैरव का हवन पूजन करने से विपक्षी दल कमजोर होता है।

भैरव पूजा से मनुष्य को रोगों-विकारों से मुक्ति मिलती है। अगर लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं तो कार्तिक की कालाष्टमी पर काल भैरव की विधिवत पूजा करें अवश्य छुटकारा मिलेगा।

काल भैरव को कुलदेवता के रूप में भी पूजा जाता है। भैरव उपासना बुरे ग्रहों के प्रभाव को खत्म कर देती है। शनि या राहु काल से पीड़ित व्यक्ति को काल भैरव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

तंत्र के देवता काल भैरव को यूं तो शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है। परंतु पंच मेवा डालकर बनाए गए रोटला प्रसाद के भोग से भी भैरव ज्लदी प्रसन्न होते हैं।

रोटला को आटे, गुड़, चीनी के साथ पंचा मेवा डालकर सेंका जाता है। इस प्रसाद के भोग से काल भैरव की पूजा करें और जीवन में चमत्कार देखें। इसके अलावा काल भैरव को सफेद चमेली का फूल अति प्रिय है। सभी सामग्रियों से काल भैरव की पूजा आपके समस्य कष्टों का निवारण कर देगी।

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