कर्नाटक के मंगलोर में स्थित है दुर्गा परमेश्वरी मंदिर, यहां निभाई जाती है अनोखी परंपरा

Quaint Media
New Delhi: अगर आपकी आस्था सच्ची है तो आपका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। यह वाकिया मंगलोर के कैथल में देवी दुर्गा परमेश्‍वरी मंदिर (Durga Parmeshwari Tempel) में बिलकुल सच साबित होता है।

यहां (Durga Parmeshwari Tempel) एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है जिसमें एक-दूसरे पर आग फेंकी जाती है। भक्‍त इसमें अपनी जा’न की कोई परवाह नहीं करते। बता दें कि यह एक परंपरा है, जिसे उत्‍सव के रूप में 8 दिनों तक मनाया जाता है।

अग्नि केलि परंपरा

लोक मान्यताओं के अनुसार अग्नि केलि नाम की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। परंपरा दो गांव आतुर और कलत्तुर के लोगों के बीच होती है। मंदिर में सबसे पहले देवी की शोभा यात्रा निकाली जाती है, जिसके बाद सभी तालाब में डुबकी लगाते हैं। फिर अलग-अलग दल बना लेते हैं।

इसके बाद अपने-अपने हाथों में नारियल की छाल से बनी मशाल लेकर एक दूसरे के विरोध में खड़े हो जाते हैं। फिर मशालों जला जाता है। इसके लिए यह परंपरा शुरू हो जाती है। फिर शुरू हो जाता है जलती मशालों को एक-दूसरे पर फेंका जाता है। यह खेल करीब 15 मिनट तक चलता है। एक शख्स को सिर्फ पांच बार जलती मशाल फेंक सकता है। बाद में वह मशाल को बुझाकर वहां से हट जाता है।

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यह है मान्‍यता

अग्नि केलि परंपरा के पीछे मान्‍यता कि अगर किसी भी व्‍यक्ति को आर्थिक या फिर शारीरिक रूप से कोई तकलीफ हो और वह इस खेल में शामिल हो जाए तो मां भवानी उसके सारे कष्‍ट दूर कर देती हैं। भक्‍त दूर-दूर से मातारानी के दर्शन कर उनसे अपनी मुराद पूरी करने की अरदास लेकर आते हैं।

विदेश में भी करते हैं मां का गुणगान

दुर्गा मां के अनोखे परंपरा वाले मंदिर में एक अद्भुत रंगमंच केंद्र है। यहां पर यक्षगान का आयोजन होता है। इसमें मां श्री दुर्गा परमेश्‍वर के अलग-अलग रूपों की कथा का वर्णन किया जाता है। इसके अलावा इन कथाओं का मंचन भी किया जाता है। बता दें कि यह नाटक बहुत ही अद्भुत होता है। यह नवंबर से शुरू होता है और मई तक भारत के अलावा विदेशों में मां के विभिन्‍न स्‍वरूपों की कथा का मंचन करता है।