चैत्र नवरात्र 2019: देवी सती के 4 शक्तिपीठ, जिन्हें आज तक कोई नहीं कर सका तलाश

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New Delhi: नवरात्र (Chaitra Navratra 2019) का पावन पर्व शुरू 6 अप्रैल से हो चुका है। माता रानी के भक्त इस पर्व पर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में दर्शन करने के लिए जाते हैं। भारत में देवी सती के कई शक्तिपीठ (Shakti Peethas) है। लेकिन आज हम आपको उन शक्तिपीठों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आजतक कोई तलाश नहीं सका।
शक्तिपीठों से जुड़ी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र थे और सती के पिता थे। सती भगवान शिव की पहली पत्नी थी। राजा दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवी-देवताओं, ऋषियों और संतों को आमंत्रित किया। लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। इस घटना से सती ने अपमानित महसूस किया क्योंकि सती को लगा राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया है। सती ने यज्ञ की अग्नि में कूद कर अपने प्रा’ण त्याग दिए।

सती के वियोग में भगवान शिव ने सती के शरीर को कंधे पर उठा तां’डव नृत्य करना आरंभ कर दिया। तब भगवान विष्णु ने शिवजी को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टु’कड़े कर दिए। ऐसे में जहां-जहां सती के शरीर के अंग, वस्त्र और अभूषण गिरे वह स्थान शक्तिपीठ बन गए। कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठ है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित है। माता सती के कुछ अंग और आभूषण देश के बाहर भी गिरे थे जहां आज भी शक्तिपीठ (Shakti Peethas) स्थित है। तो आइए जानते हैं देवी के उन आदृश्य शक्तिपीठों के बारें में…

रत्नावली शक्तिपीठ

ऐसी मान्यता है इस शक्तिपीठ में देवी मां का कंधा गिरा था। इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि देवी का यह अंग चेन्नई के आस-पास इलाकों में गिरा है। लेकिन इस जगह के बारे में आज तक किसी को मालूम नहीं है।

कालमाधव शक्तिपीठ

दूसरा शक्तिपीठ जिसके बारे में आजतक मालूम नहीं है वह है कालमाधव शक्ति पीठ। ऐसा कहा जाता है यहां पर देवी सती कालमाधव और शिव असितानंद नाम से निवास करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर देवी सती के बाएं कूल्हे गिरे थे।

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लंका शक्तिपीठ

इस स्थान पर देवी सती का आभूषण गिरा था। शास्त्रों में इस शक्तिपीठ के बारे में बताया गया है। इस स्थान के बारे में भी आज तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पंचसागर शक्तिपीठ

चौथे शक्तिपीठ के बारे में भी कोई जानकारी अब तक नहीं है। इस जगह पर सती का निचला जबड़ा गिरा था। इस स्थान पर देवी सती को वरही कहा जाता है।