रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ का दर्शन करने आते है लोग, सिंथेटिक गुलाल का नहीं होगा इस्तेमाल

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New Delhi: रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) पर इस बार बाबा विश्वनाथ की गौना बारात में सिंथेटिक गुलाल का प्रयोग नहीं होगा। मंदिर के पूर्व महंत पं. कुलपति तिवारी के आवास पर होने वाले होलिकोत्सव में इस वर्ष बाबा को फूलों और विभिन्न पत्तियों बनी अबीर अर्पित की जाएगी। अबीर में चंदन का चूर्ण भी मिलाया जाएगा।

फूलों से अबीर गुलाल बनाने का तरीका काफी पुराना है। फूलों को सुखाकर तैयार गुलाल तैयार का इस्तेमाल पूजन में भी होता है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण भी गोपियों के साथ टेसू के फूल से होली खेलते थे। टेसू के फूल का कई प्रकार की औषधियों के निर्माण में भी उपयोग होता है। इस बार गौना बारात के समय महंत आवास पर बाबा की चल रजत प्रतिमाओं के साथ भक्तों पर उड़ाई जाने वाली अबीर हर्बल होगी।

विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डा. कुलपति तिवारी के अनुसार 350 वर्षो से लगातार वर्ष में रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) पर मेरे आवास पर पालकी पर विराजमान बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती एवं गणेश की चल रजत प्रतिमाओं का राजसी स्वरूप में दर्शन होता है।

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ऐसी मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ होली खेलते हैं। 17 मार्च को सांयकाल चार बजे बाबा की शोभायात्रा निकाली जाएगी जो महंत आवास से मंदिर जक जाएगी। उन्होंने बताया कि होली का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। उस जमाने में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल होता था।